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माँ का हीरो****

Dinesh Sharma

Dinesh Sharma

कविता

October 18, 2016

पढ़ ले बेटा पढ़ ले
कुछ कर ले
काम आयेगा
नहीं तो रह जायेगा
जीरो
मास्टर जी के गूंजते
ये शब्द….
सच में रुला देते थे
भारी कदमो से लौटते
स्कूल से घर,
दस में से दो या तीन
मिले नम्बर के साथ
ऊपर से बाप की डांट-
फटकार,
माँ का बचाना-सहलाना और
दुलार,
सच में हिम्मत देती थी
उसका कहना कौन कहता है
तुझको जीरो,
तू तो है मेरा हीरो
सुनकर ये फुल जाता था
ख़ुशी से सिना,
बुरी नजर से बचाता था
माँ का लगाया काला टिका
जो आज भी बचा रहा है
बुरी नजर से
माँ की दी दुआएँ के साथ,
काला टिका*
कुछ भी हो था तो अपनी माँ का
हीरो*

*****दिनेश शर्मा*****

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Author
Dinesh Sharma
सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।

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