23.7k Members 49.9k Posts

माँ का आॅचल

माँ तेरी मुस्कान पर कुर्बां हो जाऊं मैं ,
जितने मुझको जन्म मिले तेरा ही आंचल पाऊं मैं !

तेरी गोदी में खेला तो मुझको जन्नत की मौज मिली,
पकड़ के उंगली तेरी “माँ” मैनें देखे आँगन और गली !

मैं घुटनों पे जब चलता था तुमने चलना सिखलाया था,
दुनिया की हर रित को तुमने ही तो बतलाया था !

लफ्जों में क्या बयाँ करूं तेरी ममता की गहराई को,
तेरी दुआओं के दम पर मैनें जीता हर बुराई को !

तुम संस्कारों की देवी हो क्यों मंदिर मस्जिद जाऊं मैं,
माँ तेरी मुस्कान पर कुर्बां हो जाऊं मैं !!

लकी राजेश
हिसार (हरियाणा)

This is a competition entry.

Competition Name: "माँ" - काव्य प्रतियोगिता

Voting for this competition is over.

Votes received: 61

Like 14 Comment 86
Views 394

You must be logged in to post comments.

LoginCreate Account

Loading comments
Lucky Rajesh
Lucky Rajesh
VPO KHEDAR (BARWALA)
3 Posts · 410 Views
मैं कोई बङा लेखक-कवि नहीं हूँ । बचपन से ही थोडी बहुत तुकबंदी से लिख...