Nov 9, 2018 · कविता
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‘ माँ और बेटी ‘

माँ ख़ुद अपने जीवन में मैं,तुझको अपनी जान लिखूंगी !
अभी तो आगे बढ़ना मुझको, एक नयी पहचान लिखूंगी !
इतने अहसां हैं मुझ पर की भूल नहीं सकती मैं,
न चाहूं कुछ भी मैं बस, तुझको अपनी शान लिखूंगी !!

हर वक़्त तुझे हो गर्व मुझी पे, कुछ ऐसा सम्मान लिखूंगी !
करुणा और दया तुझमें है,तुझको दयावान लिखूंगी !
न देखा है,न जाना है,कैसी है ईश्वर की काया,
अपनी क़लम से माँ तुझको मैं,धरती का भगवान लिखूंगी !!

तब कुछ न जाना छोटी थी मैं, ख़ुद को मैं अंजान लिखूंगी !
माँ शब्द ममता का सागर,ममता से धनवान लिखूंगी !
बीत गया है बचपन मेरा तेरे लिए तो मैं छोटी हूँ,
तेरा प्यार मिला मुझको माँ, ख़ुद को मैं भाग्यवान लिखूंगी !!

©® प्रमोद कुमार आर्य
जिला – बरेली

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Pramod Kumar Arya
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