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माँ और बाप

Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan

कविता

December 13, 2016

आस्थाओं की आस्था
प्रेम की पराकाष्ठा
निज का दफ़न ताप,
माँ और बाप ..

आंसुओं के नद
परवाह की हद
अपनेपन की अमिट छाप
माँ और बाप ..

कतरा कतरा अर्पण
निजसुख का तर्पण
मोह का कालजयी शाप
माँ और बाप ..

समझोतों के सौदागर
निर्भर जीवनभर
इच्छा? सुई की नाप
माँ और बाप ..

ईश्वर की क्षतिपूर्ति
गतिशील मूर्ति
व्योम सा सर पर हाथ
माँ और बाप ..

– नीरज चौहान की कलम से

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Author
Neeraj Chauhan
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

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