माँ !! ( एक फ़रियाद )

माँ !!
(एक फ़रियाद)

रात का सन्नाटा देख मुझे कूड़े में क्यों फ़ेंक दिया?
अपने ही ख़ून को यूँ आसानी से क्यों छोड़ दिया?
जन्म तो सही से मुझे लेने दिया होता न, माँ !
वक़्त से पहले क्यों मेरा गला घोंट दिया माँ?

बेटी नाम से थी तुम्हें जब इतनी ही ज़्यादा नफ़रत,
तो फिर माँ आज तू कैसे है ज़िंदा सही सलामत?
बेटी ही तो बहन,बीवी और माता बनती है न, माँ !
वक़्त से पहले क्यों मेरा गला घोंट दिया माँ?

बड़ी हसरत थी जग में आ कर नाम कमाने की,
इंद्रा, लक्ष्मी बाई, कल्पना, किरण, मीरा बन जाने की,
आँखें तो खोल ही नहीं पायी इस जगत में, माँ !
वक़्त से पहले क्यों मेरा गला घोंट दिया माँ?

अब बेहतर लगते हैं पशु-पक्षी प्राणी काफी इंसान से,
काश ख़ुदा ने मुझे पैदा किया होता उनके घर शान से,
फ़ख्र से कहती ख़ुद को जानवर की बेटी, माँ !
वक़्त से पहले क्यों मेरा गला घोंट दिया माँ?

जब जाऊंगी ख़ुदा से मिलने फ़रियाद लिए हांथों में,
गिड़गिड़ाऊंगी- न दूसरा जन्म देना अब इंसानो में,
मेरी इस बात का बिलकुल बुरा न मानना, माँ !
वक़्त से पहले क्यों मेरा गला घोंट दिया माँ?

… मो• एहतेशाम अहमद
आंडाल, पश्चिम बर्दवान (पश्चिम बंगाल)
संपर्क करें- 9378306061

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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