माँ (एक गुजारिश)

नन्हें की माँ से है आज एक गुजारिश ।
ज्यादा कुछ नहीं बस एक छोटी सी सिफारिश ।
आज से एक नवजीवन की शुरुआत करे ।
वर्षगांठ के साथ कुछ और बातें याद करे ।
बच्चे का पालन बहुत बड़ी उपाधि है ।
किसी ने निभाई पूरी तो किसी ने निभाई आधी है ।
उसे ऐसे ऐसे संस्कार सिखाना ।
सफल हो उसका इस धरा पर आना ।
ऐसे ऐसे वो प्रयास करे ।
खुद भी हो विकसित , समाज का भी विकास करे ।
माँ की उपाधि बहुत बड़ी जिम्मेदारी है ।
पर आजकल दुनिया इससे भागती जा रही है ।
इरादा नहीं किसी अच्छी माँ पर कटाक्ष करूँ ।
पर कोशिश है कि सोई माँ को जगाने का प्रयास करूँ ।
आज की पीढ़ी आधुनिक होती जा रही है ।
हमारी सभ्यता को डुबोती जा रही है ।
बन जाये आपका नन्हा कुल का अच्छा वारिस ।
ज्यादा कुछ नहीं बस एक छोटी सी सिफारिश है।
आज से एक नवजीवन की शुरुआत करे।
हर वर्षगांठ पर ये सब बातें याद करे।

कृष्ण मलिक अम्बाला हरियाणा

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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