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महेन्द्र सिंह कभी नहीं लिखता !

Dr. Mahender Singh

Dr. Mahender Singh

लेख

November 15, 2017

मैं लिखता हूँ …!
पर मैं कभी नहीं लिखता !

जो तोड़ते है,
वे जोड़ते नहीं !

ढाँप ली गई आँखें,
निष्पक्षता का धोतक है !

लोग धोखे में है !
पर्दे समर्पण सम्मान की झलक है,
लोग रीति से जोड़ लेते है !

घूँघट के पट खोल !
कहे तो,
पर्दा हटाये है,

देख महेन्द्र सिंह,
तेरी समझ कौन स्तर पर है !

Author
Dr. Mahender Singh
(आयुर्वेदाचार्य) शौक कविता, व्यंग्य, शेर, हास्य, आलोचक लेख लिखना,अध्यात्म की ओर !
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