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महिला शिक्षा की करामात

Santosh Barmaiya

Santosh Barmaiya

कविता

March 8, 2017

अभी नींद भी न खुली थी!और
जोर की आवाज आई!
ऐ मिस्टर!
हैलो, गुड मॉर्निंग!
आपके लिए है ये वॉर्निंग!
मुझे जल्दी है ऑफिस जाना।
खाना रोज की तरह चटपटा बनाना।
और लंच बॉक्स मय कॉफी ले,
सीधे ऑफिस चले आना।
ये है तुम्हारी बीबी का फरमाना।।
पहुंचा,पहुंचा,ला -लाकर,
रोजाना रूटिंन से तंग आकर,
“महोदया” से किया सवाल!
मेडम, ये क्या बात है?
ये अंत है या शुरुआत है?
मेडम ने दिया जवाब,जनाब-
ये अंत नही शुरुआत है।
ये “महिला शिक्षा” की करामात है।
अभी तो हम सिर्फ साक्षर हो रहे है,
आगे तो पड़ा सारा जमाना है।
बनाने, खाने,धोने से लेकर,
हर काम पुरुषों से करवाना है।
और यदि महिलाएं बनी कहीं”वैज्ञानिक”,
तो बच्चे भी पुरुषों से पैदा करवाना है।।
रचियता
संतोष बरमैया”जय”

Author
Santosh Barmaiya
मेरा नाम- संतोष बरमैया"जय", पिताजी - श्री कौशल किशोर बरमैया, ग्राम- कोदाझिरी,कुरई, सिवनी,म.प्र. का मूल निवासी हूँ। शिक्षा-बी.एस.सी.,एम ए, डी.ऐड,। पद- अध्यापक । साझा काव्य संग्रह - 1.गुलजार ,2.मधुबन, 3.साहित्य उदय,( प्रकाशाधीन ), पत्रिका मछुआ संदेश, तथा वर्तमान मे साहित्य-नवभारत... Read more
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