कविता · Reading time: 1 minute

“महाभारत” (एक राजनीति)….

“कौरव” कर रहा सेना तैयार,
युधिष्ठिर को हराने को।
दुर्योधन गया है, देखो;
कर्ण को मनाने को।।

कर्ण भी वचनबद्ध है,
अपने दोस्ती निभाने को।
दुःशासन भी है,साथ सदा;
कुछ मिल जाए, यदा-कदा।।

द्रोण,भीष्म की देखो, मजबूरी;
ना चाहकर भी राष्ट्रभक्तों से दूरी।
उनको सिर्फ निभाना है ,अपना धर्म ;
भूल गए वो, अपने सारे कर्म।।

युधिष्ठिर तो स्थिर बैठा है,
हाथ में कमलफूल लिए।
अर्जुन घूम-घूम बाण चला रहा,
बाकी पांडव भी योजना बना रहा।।

कृष्ण के चेहरे की मुस्कान,
सबको यों ही सता रहा है।
वो अर्जुन को गीता का सार,
समझा रहा है।।

पता नही ,अब इस युद्ध में;
कौन राजगद्दी पाएगा।
अपनी संस्कृति को बचाते,
हमारे भारत को आगे लायेगा………

स्वरचित सह मौलिक
पंकज कर्ण
कटिहार

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