कविता · Reading time: 1 minute

महात्मा बुद्ध

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बुद्ध ने सब दाव पर लगा दिये,
कठोर तपस्या पूर्ण जीवन जीये।

जिस दिन देखें कि मृत्यु है,
जिस दिन देखें कि बुढापा है,
जब देखें कि जीवन में दुख है,
उसी रात वो घर छोड़ दिये
अपना सब कुछ त्याग दिये।

बुद्ध ने सब दाव पर लगा दिये,
कठोर तपस्या पूर्ण जीवन जीये।

छः वर्ष कठोर तपस्या किये,
हड्डी-मांस-मज्जा सब सूख गये,
पेट पीठ से लग गये,
तन मन अपना सोप दिये,
अपूर्व गहन संघर्ष किये।

बुद्ध ने सब दाव पर लगा दिये,
कठोर तपस्या पूर्ण जीवन जीये।

बुद्ध ने कठिन संकल्प किये,
दर्द-पीड़ाओं को अनुभव किये,
खुद को विसर्जित कर दिये,
आखिरी चरम को पार किये,
बुद्धत्व का ज्ञान प्राप्त किये।

बुद्ध ने सब दाव पर लगा दिये,
कठोर तपस्या पूर्ण जीवन जीये।

धर्म के स्वरूप का चिंतन किये,
फिर धर्मों का उपदेश दिये,
अहिंसा पर अघिक जोर दिये,
अध्यात्मिकता का ज्ञान दिये
भक्ति मार्ग को प्रशस्त किये।

बुद्ध ने सब दाव पर लगा दिये,
कठोर तपस्या पूर्ण जीवन जीये।

????—लक्ष्मी सिंह ??

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