महत्त्व-विपक्ष मज़बूत का

महत्त्व-विपक्ष मज़बूत का
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महत्त्व बनता एक का,तानाशाही टेक।
विपक्ष ताकतवर हुआ,निर्णय गलत न एक।।
निर्णय गलत न एक,सोचे समझे विचारे।
बनकर राजा नेक,प्रजा के दुख सँवारे।।
सुन प्रीतम की बात,होश में राहें गंतव्य।
बेहोशी दुख तत्त्व,जाने नहीं है महत्त्व।

नीचा-ऊँचा भूल के,समता का उल्लेख।
सूरज देता रोशनी,समान सबको देख।
समान सबको देख,बने ऐसा ही राजा।
मिटे मनो से भेद,वक़्त का यही तकाज़ा।
जुमले बाजी छोड़,सत्य का खिला बगीचा।
डालो मत तुम फूट,विष सम कर्म ये नीचा।

सुनके सबकी बात जो,निचोड़ करता नेक।
दही मथे ज्यों घी बने,उसकी ऐसी टेक।।
उसकी ऐसी टेक,चुने मिल ऐसा नेता।
सही कर्म नित झूम,मन को है ख़ुशी देता।
लोकतंत्र में लोग,दें वोट बढ़िया चुनके।
कभी करें ना भूल,ना दें वोट वो सुनके।

वादे होंगे ख़ूब जी,सुनके पाओ चैन।
चाहत सौलह लाख की,भूल गए क्या नैन।
भूल गए क्या नैन,धन सफ़ेद हुआ काला।
खाता खाली यार,अब भी पड़ा है साला।
लोगों जागो आज,रहो ना सीधे-सादे।
देख धरातल रूप,निभा सकते क्या वादे।

आर.एस.प्रीतम

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