दोहे · Reading time: 1 minute

महँगा है पेट्रौल

महँगा है पेट्रौल
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गैस सिलिंडर ही नहीं, महँगा है पेट्रौल।
चूल्हा ठंडा है पड़ा, खून रहा है खौल।।

डीजल महँगा हो गया, सरसो का भी तेल।
बोलोगे तो साथियों, काटोगे तुम जेल।।

राजनीति का हाय रे, कैसा है यह खेल।
बेंच रहे हैं देश को, लगा हुआ है सेल।।

रोज़गार की बात पर, हर कोई है मौन।
बिकी हुई है मीडिया, बोलेगा फिर कौन।।

अच्छे दिन की आस में, हुए स्वप्न हैं चूर।
कहीं कृषक हैं कष्ट में, और कहीं मजदूर।।

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- 19/03/2021

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