मुक्तक · Reading time: 1 minute

मसूरी

मसूरी की पहाड़ियाँ १९८२ में बीरान थीं,
मानवीय प्रयासों से हरी भरी हो गईं।
पर्यटकों के वाहनों की भरमार है,
हवाएं शीतल हैं पर कुछ प्रदूषित हो गईं।

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