मुक्तक · Reading time: 1 minute

मशविरा

खाने के मुआमलात में,
ज़ुबान काबू रखना।
कहने के मुआमलात में,
ज़ुबान थामे रखना।
बड़ी बेबाक है अवधूत,
फिसलती यकायक।
बेबाकी करे मनमानी,
लगाम बाजू रखना।

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