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मर्यादा

लघुकहानी
मर्यादा

पलक शर्मा जी की बड़ी बेटी थी।पलक की छोटी बहन सुमन थी और छोटा भाई आकाश था।घर की पूरी जिम्मेदारी पलक के कन्धों पर थी। पलक ने कभी भी अपने बारे में नहीं सोचा।छोटी बहन और भाई के शौक को पूरा करते हुए उनको पढ़ा- लिखा कर काबिल बनाया। छोटी बहन की शादी करके पलक ने भाई आकाश की भी शादी कर दी।सब कुछ ठीक चल रहा था।अचानक एक दिन शर्मा जी के घर से जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज आने लगी।शर्मा जी शराब के नशे में आँखे बंद किए कुर्सी पर लुढ़के थे।आकाश ऊँची आवाज में पलक पर चिल्ला रहा था,”अरे आपको घर की मान-मर्यादा का बिल्कुल भी ख्याल नहीं है क्या?लोग हँसेंगे हमारे घर पर।”आकाश की पत्नी गीता ने भी मुँह बनाते हुए बोला,”दीदी का दिमाग खराब हो गया है,मर्यादा भी कोई चीज होती है की नहीं।”
पलक की छोटी बहन सुमन जिसकी शादी अभी पिछ्ले साल ही हुई थी।उसने भी जोर से बोला,”मेरी तो ससुराल में कोई इज़्ज़त ही नहीं रह जायेगी।मेरा तो मजाक उड़ायेंगे सभी।”
पलक चुपचाप सब सुनकर सोच रही थी कि जिस घर,भाई-बहन,पिता,भाभी के लिये अपना आधा जीवन कुर्बान कर दिया,आज उसके एक फैसले ले लेने से सारा घर उसके खिलाफ बोल रहा था।अचानक आकाश ने जोर से कहा,”नहीं चलेगा यह सब यहाँ पर इस घर की एक मर्यादा है,इतनी ही आपको जवानी चढ़ी है तो निकल जाईए इस घर से।” इस बार झटके से पलक ने सर उठाया और चीखते हुए बोली,” मैं घर से बाहर जाऊँ? भूल रहे हो शायद तुम सभी यह घर मेरे लोन लेने से ही बना है। मेरी जवानी तो तुम सबके भेंट चढ़ गई न और हाँ पचास साल की उम्र में दो बच्चों के विधुर पिता से मेरे शादी करने से जिस-जिस की इज़्ज़त दाँव पर लग रही है,मर्यादा भंग हो रही है,वह खुशी से इस घर से बाहर जा सकता है।”
अब माहौल में पूरी तरह सन्नाटा था।

मौलिक
आभा सिंह
लखनऊ उत्तर प्रदेश

Competition entry: साहित्यपीडिया कहानी प्रतियोगिता
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रहना काशी में मिरा,आभा मेरा नाम। लेखन के आकाश में,आभित होना काम।। जीवन में भरपूर हैं,मिले मुझे संघर्ष। देख दूसरे की खुशी,मिलता मुझको हर्ष।। सम्मानित मंचों से 100 से ज्यादा…
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