गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

मरहम के नाम पर जख्म देकर कहाँ चल दिये

इश्क़ फरमाकर ज़नाब कहाँ चल दिए
मरहम के नाम पर ज़ख्म देकर कहाँ चल दिए

रोशन गलियों से निकाल कर
अँधेरे में छोड़कर कहाँ चल दिए

मरते दम तक साथ देने का वादा देकर
आधी राह में छोड़ कर कहाँ चल दिए

खुशियों के तालाब में
समुंद्र का पानी देकर कहाँ चल दिए

स्वतंत्र आकाश में उड़ान भरते पंक्षी को
क़फ़स में कैद कर कहाँ चल दिए

क़ीमत लगाकर क़ल्ब की
नीलाम करने कहाँ चल दिए

मीठे मीठे सपने दिखाकर
ख़्वाब चुराकर कहाँ चल दिए

इश्क़ की आग में क़ल्ब को छोड़
फ़ुगां का उपहार देकर कहाँ चल दिए

फ़ुगां= दर्द भरी पुकार

रात दिन का पता नही अब
नींद को चुराकर कहाँ चल दिए

खिलौना नही है ज़िस्म मेरा
ज़िस्म की प्यास बुझाकर कहाँ चल दिए

जवानी का जश्न मना कर कहाँ चल दिए
अश्क़ों में डुबाकर भूपेन्द्र को कहाँ चल दिए

भूपेंद्र रावत
26।08।2017

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