ममता,प्यार,करुणा,त्याग की मूर्त ( पन्नाधाय )

ममता,प्यार,करुणा,त्याग की मूर्त
                पन्नाधाय
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राणा के पुत्र को जीवन देकर
अपने पुत्र का बलिदान किया ।
पन्नाधाय न अपनेे ममता, प्यार,
करुणा का प्रमाण दिया ।

देहांत हुआ राणा सांगा का
पुत्र उदय सिंह बनवीर को सौंप दिया । लालन पालन का अधिकार भी
बनवीर को उस क्षण दे दिया ।

नहीं पता था मन में कालुष
बनवीर के एक दिन आएगा
लोभ के लालच में आकर
मरवाना राणा के अंश को चाहेगा ।

समझ गई पन्नाधाय
उदय की धाय माँ कहलाती थी।
उदय का लालन पालन पोषण
सौभाग्य समझकर करती थी ।

देशभक्त,स्वाभिमानी महिला
एहसान राणा का माने थी ।
धाय माँ का फर्ज़ निभाती
व्यस्त लालन-पालन में रहती थी ।

पता चला जब बनवीर के
गंदे नापाक इरादों का उसको ।
उदय के बिस्तर पर उसने
लिटा दिया पुत्र को अपने ।

प्रवेश किया बनवीर ने कक्ष में
नंगी तलवार से वार किया ।
एक ही क्षण में सोच के उदय है
पन्ना के अंश को निर्ममता से मार दिया ।

समझा उसने मार दिया
मेवाड़ के होने वाले राजा को ।
पता नहीं था बचा लिया था
पन्ना ने मेवाड़ के चिराग को ।

किया बलिदान स्वयं का पुत्र 
मेवाड़ का भावी राजा बचा लिया ।
जूठे पत्तल भरी टोकरी में
महल तक उसे सुरक्षित पहुँचा दिया ।

नारी शक्ति के त्याग और बलिदान का पन्नाधाय ज्वलंत प्रमाण है ।
उदयसिंह की खातिर उसने
स्वयं पुत्र बलिदान किया ।

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