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मन

ANURAG Singh Nagpure

ANURAG Singh Nagpure

गीत

April 9, 2017

मन से मन के दीप जला लो
मन से मन को फिर महका लो
मन से मन का मेल जो होगा
हो जायेगा जग उजियारा..
मन से सच्ची बात कहो तुम मन से छल मत करो कभी तुम मन होता है बड़ा मतवाला
मन से मिलता ऊपरवाला…
मन में बैर न पालो भाई
मन से समझो पीर पराई
मन अभिमानी दोष की जड़ है
मन कीचड़ में एक कमल है…
ईश्वर होता है बड़े मनवाला भरता जो मन में प्रेम का प्याला मन से सच्चा प्रेम करो तुम मिल जायेगा मीत मनवाला…

मन मीरा है मन इक राधा
मन मोहन है मन इक राजा
मन से जब जब मीरा रोती
मन मोहन के पास वो होती…

मन से मन के दीप जला लो…@अनुराग©

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