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मन

अनीला बत्रा

अनीला बत्रा

कविता

January 28, 2017

कभी कभी तन्हाई भी खूबसूरत लगती है और कभी किसी के साथ को मन बेकरार होता है,कभी कभी मन ओढ़ लेता है नक़ाब बेसाख्ता और कभी किसी पर खुद को निसार करने को जी चाहता है।

Author
अनीला बत्रा
'ऐ ज़िन्दगी कुछ ख़ास नहीं हैं चाहतें मेरी, थोड़ी सी मुस्कान लबों पर और थोड़ी सी पहचान दिलों में..' पंजाब के शिक्षा विभाग में सीनीयर सैकेंडरी स्कूल में हिन्दी विषय की अध्यापिका हूँ।पंजाब विश्वविद्यालय से भूगोल विषय में आॅनर्स और... Read more
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