गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

मन

अग्र गामी हमारा मन कर्म गति मन बनाता है।
कि जैसे बैल गाड़ी का घूमता चक्र जाता है।।
जीत पाए जो अपना मन बहुत बलवान बन जाए।
जीत और हार का परिणाम मानव मन से आता है।।

ध्यान अरु साधना का मूल भी इस मन मे रहता है।
कर्म संकल्प का आधार भी इस मन में बहता है।।
मनीषी है वही मानव नियंत्रित मन को जो करले
दुखो के बीज से मानव हमेशा कष्ट सहता है।।

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