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***मन हुआ मगन प्रकृति संग***जापानी विद्या-चोका

जापानी साहित्य विद्या- चोका -5+7+5+7+5+7+5+7+7….
*मन प्रसन्न
हुआ यह मगन
विहग नभ
करते विचरण
शाम सुहानी
विलीन दिवाकर
प्रकृति शोभा
नभ तल चाँदनी
तरिणी जल
जन-जीवनदानी
चाँद शीतल
रजनी मतवाली
तारे चमके
जगमग गगन
क्षीर्ण नयन
छाई घोर कालिमा
जड़ मस्तिष्क
उमड़ता औत्सुक्य
नवप्रभात
प्रकट प्रभाकर
उषा किरण
आई सुभग बेला
आदि न अंत
सृष्टि नवसृजन
नमन-ही-नमन
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