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” मन हुआ गुलबिया ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

July 16, 2017

लेपित चंदन ,
मले हल्दी –
और उबटन |
रूप सजा ,
संवरा तो –
लगा ज्यों कुंदन |
फिसलन ही –
फिसलन है ,
देह हुई रेशमिया ||

कजरारा काजर ,
आँखों में –
काढ़ लिया |
प्रियतम के ,
सपनों को –
ऐसे ही ताड़ लिया |
चितवन तो –
चितवन है ,
अँखियाँ नचनियां ||

आँचल हाथों से ,
फिसले औ –
लहराये |
जंजीर बनी ,
अलकें तो –
जब तब बल खाए |
संदेशा पाते –
भरती कुलांचें ,
ऐसी हिरनिया ||

बार बार लागे ,
है आहट –
द्वार पर |
चैन कहाँ ,
अब मुझको –
पल पल मुखर |
खोया है धीरज –
हुए असहज ,
ऐसी लगनिया ||

इंतजार मानो ,
है बस की –
बात नहीं |
हाथों से छूटे ,
हैं अपने –
हालात कहीं |
खोई सुध बुध –
याद कहाँ अब कुछ ,
तेरी जुगनिया ||

बृज व्यास

Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more
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