मन मोहन छन्द

[15/09/2020 ]
मन मोहन छन्द, प्रथम प्रयास
अंत- नगण से 8,6=14
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कोरोना का, करो हरण ।
जीवन का प्रभु, करो भरण ।
रोग मुक्त हो, आज चमन ।
चारो दिश हो, शांति अमन ।
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हिम के पथ्थर , रहे पिघल ।
शिखरों से यह, निकल निकल ।
बहता कल कल, शीत तरल ।
नदियों का है, नीर विमल ।
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रावण ने कर, सिया हरण ।
राघव उसका, किया मरण ।
तुलसी ने कर, दिया सृजन ।
रामचरित जो, करे पठन।
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मुरलीधर है, आज विकल ।
राधा की नहि, दिखी सकल ।
गोप सखा सब, इधर उधर ।
कोई दिखे न, पास नजर ।
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स्वरचित:-
अभिनव मिश्रा✍️✍️
(शाहजहांपुर)

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