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मन मे उठे हिलोर

RAMESH SHARMA

RAMESH SHARMA

दोहे

May 20, 2017

रात चाँदनी चाँद की ,कालिंदी कर शोर !
देख नजारा ताज का,मन में उठे हिलोर !!

ज्यों चंदा की चाह में ,.पागल रहे चकोर!
त्यों साजन के साथ को,मन मे उठे हिलोर!!

आँखे मेरी हो गयी ,.मानो एक सराय !
जो भी आता है वही इनमे जाय समाय!!
रमेश शर्मा

Author
RAMESH SHARMA
अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा
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