मन मलाली मत कर

मन मलाली मत कर
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अपनी रुह से दलाली मत कर,
बातें ख़्याली मत कर।
सच का आईना सामने है,
झूठ पर ताली मत कर।।

वैभव सच्चे नूर से मिलता,
आदतें जाली मत कर।
अन्याय से बेखौफ़ लड़ सदा,
हज़्म रखवाली मत कर।।

तू दबेगा लोग दबाएंगे,
खुदी कंगाली मत कर।
जोश से तू अपना मन भरले,
रोकर इसे खाली मत कर।।

कमल दलदल में भी हँसता है,
भू पर निढ़ाली मत कर।
मंज़िल पर परचम लहरा दिखा,
दिन-रात सवाली मत कर।।

दाद दूँगा सदा हौंसले की,
कहकर निहाली मत कर।
सूरज को दीपक क्या दिखाना,
हसरतें काली मत कर।।

सपने ज़िंदा रख दौड़ प्रीतम,
वक़्त बदहाली मत कर।
जीत पाताल छेद लौटेगी,
तू मन मलाली मत कर।।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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सर्वाधिकार सुरक्षित कविता

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