" -------------------------------------------------- मन मयूर है नाचे " !!

उम्र सीढ़ीयां चढ़ती जाये , यौवन भरे कुलांचे !
कैसे दिल का हाल बतायें , मन मयूर है नाचे !!

रूप रंग तो बरसा ना है , दुख की छांव घनेरी !
काया मिली सलोनी ऐसी , कैसे इसे तराशें !!

कारी कारी अँखियों में जो , उजले ख़्वाब बसे हैं !
न्यारे न्यारे लगते है वे , सारे मुझे जहां से !!

जीवन की परिभाषा जानी , गूढ़ अर्थ है इसके !
औरों के मन की हलचल को , अंतर्मन से बाँचें !!

घाट घाट पर देखी फिसलन , बरतें बड़ी सजगता !
लोग यहां हैं इसी ताक में , कैसे भरें परांचे !!

बोल यहां हो तोल तोल कर , और हंसी को साधें !
अपने दर्पण धूल चढ़ी हो , लोग ओर को जांचे !!

हंसना है तो खुद पर हंस लो , यही राज़ है गहरा !
वरना झूंठे किस्से यों भी , लगते सबको सांचे !!

आज निशाना खुद पर साधूं कल फिर अग्नि परीक्षा !
परिणामों की उम्मीदों से , खिलना चाहें बांछें !!

बृज व्यास

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