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मन मथुरा तन वृन्दावन

हेमा तिवारी भट्ट

हेमा तिवारी भट्ट

कविता

May 25, 2017

?मन मथुरा,तन वृन्दावन?

मन मथुरा बना ले
कान्हा को फिर बुला ले
मोह बंधन की बेड़ी
रे झट कट जायेगी|
गले गोकुल सजा ले
कान्हा को फिर बुला ले
माखन मिश्री सी
कथन घुल जायेगी
वृन्दावन घर बना ले
कान्हा को फिर बुला ले
बंशी की मधुर धुन
जीवन बन जायेगी|
बरसाना मन बसा ले
राधा को फिर बुला ले
प्रीत सच्ची की मन में
लगन लग जायेगी|
तन मन्दिर बना ले
प्रभु को मन बसा ले
जन्मों की प्रतीक्षा
सफल हो जायेगी|
✍हेमा तिवारी भट्ट✍

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Author
हेमा तिवारी भट्ट
लिखना,पढ़ना और पढ़ाना अच्छा लगता है, खुद से खुद का ही बतियाना अच्छा लगता है, राग,द्वेष न घृृणा,कपट हो मानव के मन में , दिल में ऐसे ख्वाब सजाना अच्छा लगता है

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