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*****मन बावरा ***

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

October 12, 2017

मन बावरा

मन चंचल मन बावरा पंछी
दूर दूर तक सैर कराए।
पल में यहां तो पल में वहां
पंख लगा कर उड़ता जाए।

कभी तो लेकर यह उड़ जाता
सात समंदर पार मुझे
कभी ऐसा मूरख हो जाता
कोई रास्ता ही न सूझे।

कभी तो झूमे खूब खुशी से
कभी उदासी छा जाए।
कभी गुनगुनाता ये तराने
कभी घटा गम की छाए।

मन ही है जो हर पल हर क्षण
मानव का हर रूप दिखाए।
मानव के हर भाव का मन ही
नित्य नया दर्शन करवाए।

–रंजना माथुर दिनांक के 12/10/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

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Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more

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