कविता · Reading time: 1 minute

मन निर्मल

मन निर्मल,
तुम चंचल,
हाे सरल,
दर्शन विरल,
काया कंचन,
तुम्हे नमन,

वाणी मधुर,
सुंदर अधर,
रहती किधर,
ढूंढे नजर,
कैसी डगर,
थाेड़ा ठहर,

ताकते नैन,
भागे चैन,
हाे गये बेचैन,

।।।।जेपीएल।।।⁠⁠⁠

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