मन चंचल

मन चंचल, अधीन हम,पल-पल में भटकाये
कभी चढ़ाये पर्वत , कभी धरा पटकाये
ज्ञान की डोरी से अंकुश लगा यदि बांधे
तिनके प्रस्तर सम,जीवन संतुलित हो जाये।

6 Views
poet and story writer
You may also like: