मुक्तक · Reading time: 1 minute

मन चंचल

मन चंचल, अधीन हम,पल-पल में भटकाये
कभी चढ़ाये पर्वत , कभी धरा पटकाये
ज्ञान की डोरी से अंकुश लगा यदि बांधे
तिनके प्रस्तर सम,जीवन संतुलित हो जाये।

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