~~~मन की लहर~~~

ख्यालों की लहर
चली आयी मन में
दोपहर
कहती है चल
मेरे साथ
तुझ को ले चलूँ
उस शहर
कोई वक्त तो होगा
जब चलूँ
पकड़ तेरी लहर
कहती है,
क्यूं बैठे
हो खामोश ,
वो भी तो है उधर
रूक जा ,
सोचने दे
मेरे संग न करो
कुछ डगर डगर
कह दो उनको मिलना
हो
तो चली आये मेरे मन के अंदर..

अजीत कुमार तलवार

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