.
Skip to content

~~~मन की लहर~~~

अजीत कुमार तलवार

अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"

कविता

February 21, 2017

ख्यालों की लहर
चली आयी मन में
दोपहर
कहती है चल
मेरे साथ
तुझ को ले चलूँ
उस शहर
कोई वक्त तो होगा
जब चलूँ
पकड़ तेरी लहर
कहती है,
क्यूं बैठे
हो खामोश ,
वो भी तो है उधर
रूक जा ,
सोचने दे
मेरे संग न करो
कुछ डगर डगर
कह दो उनको मिलना
हो
तो चली आये मेरे मन के अंदर..

अजीत कुमार तलवार

Author
अजीत कुमार तलवार
शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, पूर्वज : अमृतसर से है, और वर्तमान में मेरठ से हूँ, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , EMAIL : talwarajit3@gmail.com, talwarajeet19620302@gmail.com. Whatsapp and Contact Number ::: 7599235906
Recommended Posts
मुक्तक
होते ही शाम तेरी प्यास चली आती है! मेरे ख्यालों में बदहवास चली आती है! उस वक्त टकराता हूँ गम की दीवारों से, जब भी... Read more
कुछ अनकही, कुछ अनसुनी है ये जिन्दगी बडी अनबुझी कुछ अनछुयी , कुछ अनसिली है ये ज़िंदगी बडी अनसुलझी कोई कह न पाया ,सुन न... Read more
ये शादी के बंधन
वो शादी के बंधन हैं झूठे सभी जहाँ मन से मन की लगन ही न हो वो अग्नि वो फेरे भी किस काम के जहाँ... Read more
सुन मन मेरे
???? सुन मन मेरे चल आज कुछ करें मन की मन में न रहे चल कुछ करे सुन्दर प्रकृति बड़े कितने रंग बिखेरे पड़े चल... Read more