दोहे · Reading time: 1 minute

मन्दिर भीतर भी करे, चप्पल का जो ध्यान ।

माया में है मन रमा, तन है ईश्वर द्वार ।
कैसे तेरी प्रार्थना, करें देव स्वीकार ।।

मन्दिर भीतर भी करे, चप्पल का जो ध्यान ।
मुश्किल है उस पर कृपा, कर पाएं भगवान ।।
रमेश शर्मा.

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