Aug 27, 2016 · कविता
Reading time: 1 minute

मनोविनोद

मनोविनोद

क्या कहे जमाने के हाल यंहा पर
खुदा की खुदाई हमने अजीब देखी
रहता है जो हाल ऐ सूरत से नबाबी
दिल-आदत से हालत फटीचर देखी

कड़ा है जो कठोर कैकटस की तरह
ख़ास खुदा ने उसे खुशनसीबी बख्शी
दिखने में लगे है वो सुहाना खूबसूरत
भाग्य से सूरत नरम गुलाब सी देखी

लगे सो सूरत और सीरत से भला
लोमड़ी से तेज़ चालकी उसमे देखी
देह से तो दिखे फकत लकड़ी जैसा
तेवरों में उसके गर्मी अजीब देखी

तबियत से हुआ डील डौल बेसुमार
खुराक उसकी मात्र चूहे जैसी देखी
बौनों की तो बात ही यंहा क्या कहिये
देह से दोगुनी तफ़सील जमीं नीचे देखी

गाय की खाल में भेड़िये रहते यंहा
गधो पे लिपटी शेर की खाल देखी
पहचान क्या करोगे “धर्म ” किसी की
इंसानियत के मुखोटे हैवानियत देखी

डी. के. निवातियाँ__________!!!

25 Views
Copy link to share
डी. के. निवातिया
235 Posts · 49.7k Views
Follow 12 Followers
नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ ,... View full profile
You may also like: