May 16, 2017 · कविता
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“””मनु””” के कड़वे सत्य वचन,,,,

“””मनु”””के सुप्रभात के कड़वे सत्य वचन,,,,

कुछ लोग बेवक़्त इतना कह जाते है,,,
की वक़्त आने पर उनके बोल बंद हो जाते है,,,

कुछ लोग मांगकर के अपना नुकशान करलेते है कि क्योकि देने बाले को ही फायदा पहुँचा जाते है,,,

कुछ लोग संसार की मिथक वस्तुओं के लिए जीवित इंसान को भूल जाते है,,,

जबकि दो लोग दुनिया में आने के लिए (माँ व दाई माँ)चार (भाई,भतीजा,बेटा,दोस्त,)लोग दुनिया से जाते वक्त चाहिए ही फिर क्यो भूल जाते है,,,
सब्जी मंडी है ये दुनिया और हम तुम पालक तुरिया रंग और कीमत सही रखो नही तो डला में ही सड़ जाना है,,,

मानक लाल मनु,,,
सरस्वती साहित्य परिषद,,,,

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मानक लाल
मानक लाल"मनु"
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सम्प्रति••सहायक अध्यापक 2003,,, शिक्षा••MA,हिंदी,राजनीति,संस्कृत,,, जन्मतिथि 15 मार्च 1983 पता••9993903313 साहित्य परिसद के सदस्य के रूप... View full profile
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