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मनुज में है असीम सामर्थ्य, समझ लो लगे लोक हित अर्थ !************************

अनुराग दीक्षित

अनुराग दीक्षित

कविता

October 11, 2017

सामर्थ्य / क्षमता
मनुज में है असीम सामर्थ्य,
समझ लो लगे लोक हित अर्थ !************************
लक्ष्य बिन शक्ति रहे निरुपाय
विचरते जीव अधम असहाय,
शक्ति जो निर्वल को हो सहाय
वही सच्ची सामर्थ्य कहाय,
शक्ति ना कभी गंवाएं व्यर्थ
मनुज में है असीम सामर्थ्य,
समझ लो लगे लोक हित अर्थ !**********************
प्रभु ने दिया शक्ति वरदान
रखें प्रतिपल इसका सम्मान
सर्वदा अनुचित है अभिमान,
काल रखता है दण्ड विधान
कहीं ना होवे कोई अनर्थ
मनुज में है असीम सामर्थ्य,
समझ लो लगे लोक हित अर्थ !************************

Author
अनुराग दीक्षित
मेरा जन्म फर्रुखाबाद के कमालगंज ब्लॉक के ग्राम कंझाना में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ,मैंने वनस्पति विज्ञानं में एमएससी,ऍम.ए. समाजशाह्स्त्र एवं एडवरटाइजिंग पब्लिक रिलेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया,व जन स्वास्थ्य में,परास्नातक डिप्लोमा किया, विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशन एवं... Read more
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