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मनहर घनाक्षरी छंद

Mahatam Mishra

Mahatam Mishra

कविता

September 17, 2016

मंच को सादर निवेदित एक रचना…….
“मनहर घनाक्षरी”

बहुत विचार हुआ, दिल से करार हुआ, अब हिल मिल सब, मान भी बढ़ाइए
राष्ट्र भाषा हिंदी बिंदी, ललिता लाली कालिंदी, कन्या कुमारी काश्मीर, राग धुन गाइए
भेष भूसा साथ साथ, राष्ट्र गान सुप्रभात, बीर बलवान त्याग, सैन्य दुलराइए
गौतम दुलार घर, वन बाग़ जल थल, माँ भारती की महिमा, झंडा लहराइए।।

खान-पान स्वच्छ रहे, काया काल स्वस्थ रहे, मन में लगन हो तो, आकाश हो आइए
पूर्वजी प्रताप संग, मातु महा पितृ पक्ष, अर्पण तर्पण श्राद्ध, गया मोक्ष पाइए
सूर्य उपासना है, श्राद्ध श्रद्धा साधना है, जव तील अक्षत ले, विनम्र चढ़ाइए
संस्कृति संस्कार पूज्य, वेद व कुरान सुज्ञ, नीति रीति गरिमा है, गौतम बनाइए।।

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

Author
Mahatam Mishra
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