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मनहर घनाक्षरी छंद

Mahatam Mishra

Mahatam Mishra

कविता

September 10, 2016

हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई आप सभी को एक कवित्त के साथ…….

“मनहर घनाक्षरी”

भावना श्रृंगार लिए, रस छंद भाव पिए, हिंदी छेड़े मीठी तान, गान मान गाइए
प्रकृति से प्यार करें, गाँव से दुलार करें, शहरी सिनेमा संग, देखिए दिखाइए
साहित्य पुकारे मान, मनहरे कवि गान, घनाक्षरी कवित्त की, महिमा सुनाइए
हिल-मिल गौतम जी, देश राग उत्तम जी, मौसी-माँ बहन बोली, मत विसराइए।।

देश-विदेश प्रदेश में, हिंदी शिव गणेश में, जायसी रसखान का, अमृत पी जाइए
कबीर सुर तुलसी का, पढ़ें प्यार हुलसी का, मीरा माँ की चाहना, राणा राग गाइए
वेद पुराण कहत, नीति कुरान चहत, महावीर गौतम से, सीख शुद्ध पाइए
माँ भारती की महिमा, काश्मीर की गरिमा, हिमालय का ललाट, तिलक लगाइए।।

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

Author
Mahatam Mishra
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