Dec 5, 2020 · कविता
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मनमोहिनी /आलिंगन

१.मनमोहिनी

तेरी छवि मनमोहिनी
स्पृहणीय तू कामिनी
पंकजा नयन
सुराहिदार गर्दन
कुंतल कसे
चूड़ामणि जँचे
स्वर्ण कर्णफूल
सोहे नथनी झूल
ढलका आँचल
मनवा चंचल
बलखाती कमर
सस्मित अधर
मलयानिल श्वास
सौरभ आभास
तेरी स्पृहा अभीप्सा
न देखा कोई तुझसा

२.आलिंगन

प्रणय आलिंगन
महक उठा तन
सुरभित मन
सुवास बदन
ख़ुशबू सदन
सुगंध कण कण
सौरभ जीवन
मन मगन
इस बंधन

रेखा
कोलकाता

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Rekha Drolia
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दिल से दिलों तक पहुँचने हेतु बाँध रही हूँ स्नेह शब्दों के सेतु। मैं एक... View full profile
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