हाइकु · Reading time: 1 minute

मनभावन १० हाइकु

मिट्टी का माधो
मत बन इंसान
जीवन साध

क्रोध है आता
भवंडर मचाता
त्रासदी लाता

प्रात: की बेला
उदित प्रभाकर
लगा है मेला

तरु की छाया
है राहत दिलाए
प्रभु की माया

बही बयार
मुस्काई है प्रकृति
गाए मल्हार

सर्दी की मार
गरीब सहे जाए
दिखे लाचार

कुर्सी के मारे
नेता सभी हमारे
लगाएँ नारे

स्वार्थ में नेता
करता है पाखंड
बेहाली देता

सद् विचार
बढ़े कुल की शान
सजे आचार

ज्ञान कुबेर
प्रवाहित हमेशा
भौर सवेर

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