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मनभावन सावन

aparna thapliyal

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हाइकु

July 9, 2017


बूँदों का नृत्य
सोंधी मिट्टी महकी
हवा बहकी ।
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मोर मचला
घन गाई गज़ल
नृत्य छलका ।
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मोरनी मोर
घन घटा का शोर
मस्तानी भोर।
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कारे बदरा
लताओं का सेहरा
भीगे मनवा।
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स्वाती की बूँदें
आसमान से कूदें
प्यास बुझा दें।

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सावन आया
अवनी मन भाया
संतुष्टि लाया।
अपर्णा थपलियाल”रानू”
८.०७.२०१७

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