गीत · Reading time: 2 minutes

मधुशाला-नया अवतार-2

मधुशाला -नया अवतार -1 तब लिखा गया था जब लोग शराब ठेका की लाइन में लगे हुए थे। अब मधुशाला-नया अवतार -2 परीक्षण उपरांत लिखा गया है। पीने के बाद पीने वालों की अभिव्यक्ति आत्मविश्वास चाल ढाल इत्यादि निष्कर्ष के आधार।
कुछ पियक्कड़ तो यहाँ तक कह गए कि ठेका खुलने के बाद परिणामस्वरूप दूसरे दिन ही कोरोना पॉजिटिव की बेतहाशा वृद्धि हुई। अरे भैया कोरोना वायरस शराब के नशा जैसे तत्काल अपना असर थोड़ी दिखा पाता है। हप्ता भर तो कुछ पता ही नहीं चलता। तीन-चार दिन बाद तो जांच रिपोर्ट ही आ पाती है। खैर आप आनन्द लीजिए-

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नहीं जरूरत अस्पताल की, बंद रखो भी पठशाला।
दवा खिला कर के क्या होगा, पैग पिला दारू प्याला।।
होगा तन मन स्वस्थ-मस्त, पैदा हों ज्ञानी महा गुरू ;
सर्वश्रेष्ठ है दुनिया भर में, सचमुच समझो मधुशाला।।
नहीं जरूरत अस्पताल की, बंद रखो भी पठशाला।
गुटखा गांजा पूंजी देते, वोट दिलाती मधुशाला।।1

हॉस्पिटल को बना दो हौली, विद्यालय में दे ताला।
चिकन मटन संग पीपी मदिरा, निखरे सुंदर स्वर गाला।।
मधुशाला से रह-रह निकले, डिग्रीधारी क्या होते ;
एक एक से अर्थशास्त्री, वैज्ञानिक अधिवक्ता लॉ।
नहीं जरूरत………
गुटखा गांजा ……..2

क्या करना है सेनिटाइजर, स्प्रे चौक सड़क नाला।
अंतर से ही तर ‘गर कर दो, बीमारी पे दे भाला।।
खर्चा-पर्चा नर्स डॉक्टर, वार्ड बॉय को हटा सही;
पिला गटागट सोम सुधा रस, उठ बैठे मरने वाला।।
नहीं जरूरत………
गुटखा गांजा ……..3

जो भी नफरत फैलाते हैं, जाति धर्म मजहब घाला।
घृणा ईर्ष्या द्वेष मिटाकर, गले मिलेंगे मधुशाला।।
बार-बार आजमा के देखो, पाओगे हर बार सही ;
मंदिर-मस्जिद हुए नफरती, शत्रु ईश-अल्लाताला।।
नहीं जरूरत………
गुटखा गांजा ……..4

पिये न अब तक उमड़ रही है, पीने की इच्छा हाला।
द्वेष दम्भ छल बल जो दिल में, निकले भी बाहर काला।।
मन की क्यों रह जाये अब तो, मानो भी सरकार मेरी;
भीड़ लगाना क्यों पड़ जाए, पहुँचा दो घर-घर ला ला।।
नहीं जरूरत………
गुटखा गांजा ……..5

माथा पच्ची कर जो लिखता, ढूंढ ढूंढ रस लय डाला।
मंच गोष्ठी दूर की बातें, सुनी न बच्चों की खाला।।
कहलाता तुकबंद गप्प कवि, ओज हीन रस हीन सही ;
बैठा मान विश्व कवि खुद को, पी कर मदिरा मतवाला।।
नहीं जरूरत………
गुटखा गांजा ……..6

गजब हो गया लॉक डाउन में, पीते संग जीजा साला।
पिता पुत्र हैं पैक लड़ते, घर-घर खुल गई मधुशाला।।
महिलाएं भी रह न पाई, पुरुषों की है बात अलग ;
शरमाता कितना था ‘कौशल’, पी शराब सब बक डाला।।
नहीं जरूरत……….
गुटखा गांजा……….7

©®कौशलेन्द्र सिंह लोधी ‘कौशल’
मो.नं. 9399462514

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Author
कौशलेन्द्र सिंह लोधी "कौशल" कवि ग्राम- मतरी बर्मेन्द्र, तहसील- उंचेहरा, जिला- सतना (म.प्र.) का मूल निवासी हूँ। वर्तमान में राजस्व निरीक्षक पद पर तहसील-बल्देवगढ़, जिला-टीकमगढ़ (म.प्र.) में सेवारत I शिक्षा…
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