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मधुर मिलन

मधुर मिलन की पूर्णता,भरे हृदय में प्रीतl
जीवन मधुमय हो गया,गूँज उठा संगीत ll

कुन्द कुसुम खिलने लगे, जब आये तुम द्वार l
फूट -फूट बहने लगी, मादक मधु की धारll

स्वप्न पंख फैला लिए, नींद क्षितिज के पारl
अर्पण मेरा सर्वस्व है, तुम पर प्राणाधार ।।

मन हर्षित होने लगा, पा कर अनुपम भेंट।
होठों की मुस्कान पर, दिया प्रेम रस फेंट ।।

पिक की मधुमय बाँसुरी, छेड़े पंचम राग।
तृप्त हुई हर वेदना,प्रखर प्रणय की आग ।।
-लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली

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लक्ष्मी सिंह
लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली
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MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is...
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