मधुर मिलन

*मधुर मिलन*

खनके मन के तार सखी रे!
साँस बन गई शहनाई ।
धड़कन बन गई ढोल बावली,
नस-नस ने बीन बजाई ।।
छनके घुँघरू आहों के ,
सब तन्त्र झुनझुना बन गया।
बही राग मल्हार कामना ,
प्रीत तुनतुना तन गया ।।
बालकमन मतवाला गाए ,
नाचे मस्त मयूरा बन ।
चली प्रेम की हवा सुहानी,
बरस उठा नेहा छन-छन ।।
खिले सुमन मन मादक के,
पिया भ्रमर मनवार करे ।
मान “मौज” मन मीत विनय,
नवल-नवल उपहार धरे ।।
दिल धड़का ली अंगड़ाई,
अरमान घटाएं घिर आई ।
उड़ी चुनरिया हया गई,
मत्त यौवन बगिया लहराई ।।
सखि! घाघरा घूम गया ,
कलियों को भँवरा चूम गया ।
ऐसी नाची आज सखि मैं ,
धरा- गगन सब घूम गया ।।
सारी सृष्टि नाच उठी,
लगा ये जीवन नाचने ।
अदभुत-अलबेला मन-नाच,
घर-आँगन खुशियाँ राचने ।।

*विमला महरिया “मौज”*

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विमला महरिया "मौज" जन्म तिथि - 20/12/1980 सम्प्रति : अध्यापिका विधा : कविता ,लेख ,समीक्षा,जीवनी...
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