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मधुर-मधुर मन्द-मन्द

Dr. umesh chandra srivastava

Dr. umesh chandra srivastava

कविता

July 30, 2016

मधुर-मधुर मन्द-मन्द , मोहन मुस्काये
मोर मुकुट तिलक भाल
वैज्यंती कण्ठ माल
नूपुर की ध्वनि रसाल, छम-छम थिर धायें
चपल नयन चंचल मन
श्याम केश श्यामल तन
करधनि कटि पीत वसन, कुण्डल झलकायें
मचल-मचल भूमि लोटि
खींचत लट झपट चोटि
लीला कर कोटि-कोटि, मटक-मटक जायें
मुँड़-मुँड़ हँस किलक जात
लुक छिप सँग हँसत भ्रात
माँखन मुख लेप गात अनुपम सुख पायें
मुरली धुन साम-ताल
नाँचत भूतल त्रिकाल
गोपिन सँग ग्वाल-वालरुन-झुन मिल गायें
कौतुकमय बाल रूप
निरख नन्द छवि अनूप
पुलक किलक लिपट धाय जसुमति दुलरायें

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Author
Dr. umesh chandra srivastava
Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India
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