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मदिरा सवैया छंद

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

मुक्तक

February 13, 2017

मुक्तक
1
याद पिया तुमको करके बरसी अँखियाँ इस सावन में
यूँ लगता बिजली कड़की अपने मन के इस आँगन में
नाच रही जल बूँद टपाटप मोहक देकर ताल पिया
भीग रहा तन बारिश में पर प्यास भरी कितनी मन में

2
मात समान धरा अपनी इससे सब मानव प्यार करो
कर्म भले कर मानवता पर ही कुछ तो उपकार करो
बीत गये पल जीवन में फिर वापस लौट नहीं सकते
राह चलो जिस भी पहले उस पे तुम सोच विचार करो

3
स्वार्थ भरी दुनिया इसमें किसको अपना मनमीत लिखूं
कागज़ पे अपने दिल के अब भाव भरे कुछ गीत लिखूं
हार रहा सच रोज यहाँ अब झूठ उठा सर बोल रहा
सोच रही तब ही अपनी हर हार यहाँ बस जीत लिखूं

4
राम मिले उनको कब जो बस नाम लिया करते जग में
पावन कर्म महान करो यह नाम किया करते जग में
जन्म मिला हमको जब मानव का इसको मत व्यर्थ करो
मुश्किल में न कभी डरते वह खूब जिया करते जग में

डॉ अर्चना गुप्ता

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Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more

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