मदिरा सवैया छंद

मुक्तक
1
याद पिया तुमको करके बरसी अँखियाँ इस सावन में
यूँ लगता बिजली कड़की अपने मन के इस आँगन में
नाच रही जल बूँद टपाटप मोहक देकर ताल पिया
भीग रहा तन बारिश में पर प्यास भरी कितनी मन में

2
मात समान धरा अपनी इससे सब मानव प्यार करो
कर्म भले कर मानवता पर ही कुछ तो उपकार करो
बीत गये पल जीवन में फिर वापस लौट नहीं सकते
राह चलो जिस भी पहले उस पे तुम सोच विचार करो

3
स्वार्थ भरी दुनिया इसमें किसको अपना मनमीत लिखूं
कागज़ पे अपने दिल के अब भाव भरे कुछ गीत लिखूं
हार रहा सच रोज यहाँ अब झूठ उठा सर बोल रहा
सोच रही तब ही अपनी हर हार यहाँ बस जीत लिखूं

4
राम मिले उनको कब जो बस नाम लिया करते जग में
पावन कर्म महान करो यह नाम किया करते जग में
जन्म मिला हमको जब मानव का इसको मत व्यर्थ करो
मुश्किल में न कभी डरते वह खूब जिया करते जग में

डॉ अर्चना गुप्ता

Like 1 Comment 0
Views 1.1k

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share