May 1, 2019 · मुक्तक
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मदलेखा छंद

राधा के गिरधारी,मीरा के बनवारी !
मेरी भी सुध लेना,पीड़ाएं हर लेना !

मैं भी राह निहारूँ ,ले ले नाम पुकारूँ !
आओ मोहन आओ,नैया पार लगाओ !
रमेश शर्मा.

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RAMESH SHARMA
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दोहे की दो पंक्तियाँ, करती प्रखर प्रहार ! फीकी जिसके सामने, तलवारों की धार! !... View full profile
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