** मत रखना रूह को रहन **

मत रखना रूह को किसी के प्यार में रहन
सुन ले तूं दिल की लगी कैसे दिल में अगन
महबूब जो कहता रहा दिल की लगी लगन
दिल से ना करना दिल्लगी बुरा है ये चलन
मत रखना रूह को किसी के प्यार में रहन
मरना तो है इक दिन जीने से पहले ना मर
ना हो मजबूर यूं किसी के प्यार में सनम
अपना ही दिल मजबूर क्यूं प्यार में सनम
दिल को दिलबर ही तो प्यारा है सनम
हर जन्म के बाद हो दिलबर का जनम
ख्वाहिस मत रख दिल में अपने दिलबर
मत रखना रूह को किसी के प्यार में रहन।।
?मधुप बैरागी

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