नहीं भटकिए आप, मिलेंगे यम कुछ आगे

आगे मंदिर कृष्ण का, पीछे आश्रम-धाक|
आँगन में फिर भी चले, प्रतिदिन द्वंद-पिनाक||
प्रतिदिन द्वंद-पिनाक, करेला नीम चढ़ा है|
साँप लोटते साथ, मनुज कें सींग कढा है||
कह “नायक” कविराय, जगत् साया के आगे,
नहीं भटकिए आप, मिलेंगे यम, कुछ आगे||

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

धाक=आधार,प्रसिद्धि

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