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*** मत पूछ ***

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

शेर

August 18, 2017

मत पूछ मुझे महोबत ने क्या क्या दिया

बहुत से जख्म दिए कुछ और बाकी है ।।
. ?मधुप बैरागी

मत डूबो इतना कल्पनाओं में कवियों कि रवि बन जाओ

तपन दिल की है या अगन कोई और कि कवि बन जाओ

समझो जमाने को जो ताप सह पाया है सूरज का दूर से

चाँद रोशनी पा रहता दूर कहीँ एकांत दुखी ना बन जाओ

?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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