.
Skip to content

मत पूछ यहाँ आलम क्या है

Vijay Yadav

Vijay Yadav

गज़ल/गीतिका

February 8, 2017

मत पूछ यहाँ आलम क्या है,

तेरे जाने का गम क्या है।

चेहरे पे कई रुत आ के गई,

आँखों में मौसम नम सा है।

यादों से तेरी भर लेता हूँ,

दिल में जो ये खालीपन सा है।

सब कुछ हो कर भी जाने क्यों,

लगता है पर कुछ कम सा है।

नींदों में कोई छू जाता है,

तुम हो या कोई वहम सा है।

है दूर बहुत, पर दिखता है,

ये चाँद भी मेरे सनम सा है।

तुम लाख कहो, है इश्क़ बुरा,

मुझपे ये खुदा का करम सा है।

Author
Vijay Yadav
I am an Engineer. I like read and write poems, songs, gazals.
Recommended Posts
जनक छंद में तेवरी
छंद विधान: मापनी: हर प्रथम पंक्ति में मात्राएँ 22 22 212 =13 हर दुसरी पंक्ति में 22 22 212, 22 22 212 अर्थात इस तरह... Read more
आदमी सा लगा....।
आदमी सा लगा.......।। बड़ा अजीब मंजर था जानाजे का उसके.। वहां मौजूद हर सख्श बुझा बुझा सा लगा.। न पूछ उसके मरने का सबब मुझसे.।... Read more
जनक छंद में तेवरी
तेवरी काव्य जनक छंद में तेवरी –एक कोशिश ००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००० छंद विधान: मापनी: हर प्रथम पंक्ति में मात्राएँ 22 22 २12 =13 हर दुसरी पंक्ति में... Read more
जलवायु परिवर्तन में कविता : अंदाज़े बंया क्या हैं!
ये धुँआ धुँआ सा अब क्या हैं देखो जँहा को क्या हो गया हैं! नही किसी को फ़िक्र कल की ये जीने का अन्दाज़े बंया... Read more